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भारत में कृषि : पुनरावलोकन और संभावनाएं

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तीन प्रमुख चुनौतियों की पहचान की गई है जिनसे आने वाले वर्षों में भारतीय कृषि को निपटना होगा । पहली चुनौती कृषि विपणन की है । दूसरा मुद्दा उत्पादन स्तर बनाए रखने का है और तीसरा , पोषण सुरक्षा हासिल करने पर केंद्रित है । तीनों लक्ष्य आपस में जुड़े हुए हैं और इन अंतर्संबंधों को ध्यान में रखते हुए नीति तैयार की जानी चाहिए । गेहूं और चावल में हमारी सफलता की कहानी हमें कई सबक देती है-- कुछ दोहराने के लिए . कुछ शायद परिष्कृत करने के लिए । __________________________________________ भारत एक समय में खाद्यान्न की कमी वाला देश होने से लेकर अतिरिक्त खाद्यान्न वाला देश बनने तक का लंबा सफर तय कर चुका है । आज़ादी के बाद के वर्षों में खाद्यान्न की कमी आम बात थी । उत्पादकता एक ऐसी समस्या थी जिससे भारत जूझ रहा था । अधिकांश फसली क्षेत्र के वर्षा सिंचित होने के कारण मानसून देश में उत्पादन का एक महत्वपूर्ण निर्धारक था और उसके अनुसार देश में खाद्यान्न की ज़रूरत घटती - बढ़ती रहती थी । उर्वरकों का प्रयोग लगभग न के बराबर था । सुनिश्चित सिंचाई का अभाव और उर्वरकों तथा कीटनाशकों की अनुपलब्धता ने भारत की खाद्यान्न ...