सुदृढ़ बुनियादी ढांचे से ग्रामीण भारत का विकास

सुदृढ बुनियादी ढांचे से ग्रामीण भारत का विकास

एक मजबूत ग्रामीण बुनियादी ढांचा अपने बहुआयामी प्रभाव से ग्रामीण परिवर्तन में योगदान देता है । इसलिए विपरीत पलायन करने वाले प्रवासियों सहित करोड़ों ग्रामीण निवासियों की आय और आजीविका सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण और सुदृढ़ीकरण को सुनिश्चित करने की सख्त आवश्यकता है । हालांकि मुख्य चुनौतियां निवेश को आकर्षित करने , गुणवत्ता बनाए रखने और भारत सरकार के कई संबंधित मंत्रालयों / विभागों के कार्यक्रमों और योजनाओं के अभिसरण को सुनिश्चित करने से जुड़ी हैं ।

आत्मनिर्भर भारत के मिशन को पूरा करने के लिए एक सुदृढ़ ग्रामीण बुनियादी ढांचा अत्यावश्यक है । अपने प्रणालीगत लिंकेज प्रभावों- बैकवर्ड और फॉरवर्ड दोनों के माध्यम से मज़बूत हुआ ग्रामीण बुनियादी ढांचा कृषि और गैर - कृषि उत्पाद विपणन के बेहतर विकल्प प्रदान करने में सक्षम है और इस तरह ग्रामीण व्यवस्था में विभिन्न गतिविधियों में संलग्न किसानों , निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं को पर्याप्त पारिश्रमिक देने में सक्षम है । घर - घर तक वस्तुओं की उपलब्धता और सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करके मज़बूत बुनियादी ढांचा कठिनाइयों को भी कम करता है और उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करता है । अध्ययनों से भी यह भली - भांति सिद्ध हुआ है कि एक सुविकसित ग्रामीण बुनियादी ढांचा समावेशी विकास में सकारात्मक योगदान देता है क्योंकि यह न केवल शेष अर्थव्यवस्था के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था के एकीकरण की सुविधा प्रदान करता है बल्कि उत्पादन और संभरण की कम लागत और रसद के माध्यम से आर्थिक विकास , उत्पादकता में बढ़ोत्तरी , बड़े पैमाने पर किफायतों में सुधार , रोजगार में वृद्धि , बेहतर अर्थव्यवस्था , और ग्रामीण कृषि और गैर - कृषि गतिविधियों में सार्वजनिक और निजी निवेश में वृद्धि भी सुनिश्चित करता है । बुनियादी ढांचा आत्मनिर्भर भारत के पांच अंतर्निहित स्तंभों में से एक है । अन्य चार हैं- अर्थव्यवस्था , प्रौद्योगिकी - संचालित कार्य व्यवस्था , स्पंदनशील जनसांख्यिकी और मांग । ' बुनियादी ढांचा ' शब्द के व्यापक अर्थ हैं । यह अनेक खंडों और विषय क्षेत्रों में फैला हुआ है । नतीजतन बुनियादी ढांचे के विकास के लिए वांछित कार्यक्रम कई संबद्ध मंत्रालयों और भारत सरकार के विभागों तथा राज्य सरकारों द्वारा कार्यान्वित किए जाते हैं । ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास को एक बहु - आयामी कार्यनीति के रूप में लिया गया है जिसमें विशेष क्षेत्रों जैसे सड़कों के निर्माण और रखरखाव ( जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना ) से लेकर बुनियादी ढांचे की सुविधाओं ( श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन ) के लिए क्लस्टर विकास तक की केंद्रित पहलें शामिल हैं । बुनियादी ढांचा एक



नोटः कोष्ठक में दिए गए आंकड़े कुल का प्रतिशत हैं । स्रोतः ' भारत में सड़क दुर्घटनाएं : 2019 ' , सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय , भारत सरकार । सार्वजनिक सुविधा होने के कारण इसकी परिसम्पत्तियों के निर्माण और रखरखाव में सरकार की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है । इस संदर्भ में लेख में भौतिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा की गई कुछ हालिया पहलों का आकलन करने का प्रयास किया गया है जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान के लिए आवश्यक हैं , विशेष रूप से कोविड -19 महामारी और उसके फलस्वरूप लगे लॉकडाउन और विपरीत प्रवास की पृष्ठभूमि में । 

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कुछ नई पहले 

बजट 2021-22 ने इस क्षेत्र के लिए बड़ी संख्या में घोषणाएं करके महामारी की पृष्ठभूमि में बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने की आवश्यकता को रेखांकित किया । इनमें उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाओं से लेकर मेगा टेक्सटाइल पार्क ; राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन को मजबूत करने से लेकर विकास से सम्बंधित वित्तीय संस्थान की रचना का प्रस्ताव ; परिसंपत्ति मुद्रीकरण से लेकर पूंजी बजट बढ़ाना तक शामिल हैं । महामारी और इसके परिणामस्वरूप आर्थिक गतिविधियों के बंद होने के कारण बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में , विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में , कई कदम उठाने पड़े थे । ग्रामीण क्षेत्रों में वस्तुओं और सेवाओं की मांग बढ़ाने और ग्रामीण उत्पादों के विपणन को सुविधाजनक बनाने के संदर्भ में इनका दोहरा प्रभाव पड़ता है । बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के पूर्ण होने की आमतौर पर एक लंबी अवधि होती है और इसमें हमेशा उच्च निवेश की आवश्यकता होती है । प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यों के माध्यम से टिकाऊ ग्रामीण बुनियादी ढांचा परिसंपत्ति की रचना और ग्रामीण मांग को प्रेरित करने के लिए रोज़गार पैदा करने के संदर्भ में दिसंबर 2020 में भारत सरकार और न्यू डेवलपमेंट बैंक के बीच एक महत्वपूर्ण ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे ।
स्थायी ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण पर सार्वजनिक नीति में ज़ोर कोई नई बात नहीं है । ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मज़बूत करना देश की पंचवर्षीय योजनाओं और वार्षिक योजना पहलों का अभिन्न अंग रहा है जिसका एकमात्र उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी , आय और आजीविका की असुरक्षा के मुद्दों का समाधान खोज कर ग्रामीण भारत को सशक्त बनाना है । भारत सरकार ने 1995-96 में राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक ( नाबार्ड ) के अंतर्गत ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष ( आरआईडीएफ ) की स्थापना की थी , जिसकी आरंभिक समग्र निधि 2,000 करोड़ रुपये थी । आरआईडीएफ का संचयी आवंटन 2020-21 में 3,78,348 करोड़ रुपये था । आरआईडीएफ के तहत कृषि क्षेत्र से संबंधित गतिविधियों से लेकर सामाजिक क्षेत्र और ग्रामीण कनेक्टिविटी तक विभिन्न गतिविधियां शामिल हैं । गरीब कल्याण रोजगार अभियान जून , 2020 में विशेष रूप से महामारी से उत्पन्न मुद्दों से निपटने के लिए शुरू किया गया था । यह अभियान फौरन रोज़गार प्रदान करने और विपरीत पलायन करने वाले प्रवासियों के लिए 125 दिनों की अवधि तक आजीविका के अवसर पैदा करने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए शुरू किया गया था । इस अभियान में भारत सरकार के 12 मंत्रालयों / विभागों की 25 चालू योजनाओं के प्रयासों को सम्मिलित किया गया । अभियान के तहत 50 करोड़ से अधिक मानव दिवस रोजगार सृजित किए गए । महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना ( मनरेगा ) आजीविका सुरक्षा प्रदान करने और टिकाऊ ग्रामीण परिसंपत्तियों के निर्माण के दोहरे उद्देश्यों को पूरा करती है । मनरेगा मजदूरी दर संबंधित राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों में कीमतों के उतार - चढ़ाव के अनुसार 2019-20 की मजदूरी दर को संशोधित करके अधिक निर्धारित की गई और ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा 1 अप्रैल , 2020 से लागू करने के लिए अधिसूचित किया गया । 1 अप्रैल , 2020 से 6 फरवरी , 2021 तक 326 करोड से अधिक व्यक्ति - दिवस उत्पन्न हुए जो कि 2019-20 में इसी अवधि के दौरान उत्पन्न रोजगार से लगभग 44 प्रतिशत अधिक था । इसके अलावा , प्रधानमंत्री आवास योजना - ( ग्रामीण ) का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में कच्चे और जीर्ण शीर्ण घरों में रहने वाले सभी ग्रामीण बेघर परिवारों और परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के साथ पक्के घर उपलब्ध कराना है । इस कार्यक्रम के तहत 2020-21 में 24.44 लाख घरों का निर्माण पूरा हुआ । परिवहन को सशक्त बनाना भारत में लगभग 59 लाख किलोमीटर का विशाल सड़क नेटवर्क है जो अमेरिका के बाद दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है । इसमें से 71 प्रतिशत ग्रामीण सड़कें हैं जो ग्रामीण क्षेत्रों को आपस में जोड़ती हैं ( तालिका -1 ) । नेटवर्क का 2 प्रतिशत से अधिक भाग परिवहन प्रणाली का प्रमुख अंग यानी राष्ट्रीय राजमार्ग 
हैं जो राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों और ग्रामीण / शहरी क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं और देश के एक भाग को दूसरे भाग से जोड़ते हैं । महामारी और लॉकडाउन के बावजूद 2020-21 में प्रतिदिन 37 किलोमीटर राजमार्ग बनाने की उल्लेखनीय उपलब्धि रही । बेहतर सड़कें बनाना सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में की गई पहले वास्तव में पथ - प्रवर्तक रही हैं । इनमें से एक निर्णय भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा नेटवर्क सर्वे व्हीकल को तैनात करने का है । इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है । सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार 2019 के दौरान देश में सभी सड़क दुर्घटनाओं में से 36 प्रतिशत राष्ट्रीय राजमार्गों पर हुई । ग्रामीण या शहरी क्षेत्र का ब्यौरा दर्शाता है कि सभी सड़क दुर्घटनाओं में से 60.34 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में हुई हैं । जाहिर है इस स्थिति में सुधारात्मक कार्रवाई की ज़रूरत है । इस दिशा में एक कदम और रहा गोल्डन ऑवर यानी दुर्घटना बाद पहले अहम् घंटे के दौरान घायलों को समय पर सहायता सुनिश्चित करवाना जिसके लिए अप्रैल , 2021 में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने विभिन्न राज्यों / केंद्रशासित प्रदेशों के लिए जीवनरक्षक सहायता प्रणाली के साथ 90 बेसिक केयर एम्बुलेंसों को हरी झंडी दिखाई । महामारी से उत्पन्न स्थिति को ध्यान में रखते हुए उपयोगकर्ताओं के लिए अनेक सक्रिय कदम उठाए गए हैं जिससे सेवाओं की उपलब्धता सुगम हो । इनमें से कुछ हैं ऑनलाइन सेवाएं प्रदान करना जैसे लर्नर लाइसेंस आदि और ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए अनुग्रह अवधि प्रदान करना , आवश्यक सामान ले जाने वाले ट्रकों / लॉरियों के अंतर - राज्यीय सीमा से आवागमन की सुविधा आदि । ग्रामीण क्षेत्रों में ऐप - आधारित दोपहिया टैक्सियों के संचालन के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के सुझाव से खेतिहर और अन्य ग्रामीण समुदायों को अपनी गतिविधिओं के सुचारू संचालन में सहायता मिलेगी । सड़क - ट्रेनों की सुरक्षा आवश्यकताओं के मसौदे को जारी करना माल की कुशल आवाजाही की दिशा में प्रयास के साथ - साथ
पर्यावरण हितकारी विसंकुलता की ओर एक कदम है । व्यापक नेटवर्क के कारण रेलवे लंबी दूरी की यात्रा के लिए परिवहन का पसंदीदा साधन है । महामारी के दौरान जिसमें लॉकडाउन भी शामिल है , रेलवे ने यह सुनिश्चित रखा कि आवश्यक वस्तुएं , जिनमें खाद्यान्न , फल और सब्जियां शामिल हैं , अपने गंतव्य तक पहुंचे । लोगों को महामारी के प्रसार से बचाने के उद्देश्य से रेलवे ने वृहद् उपायों की घोषणा की जिनमें गैर - ज़रूरी यात्रा न करने का आग्रह और चरणबद्ध तरीके से यात्री सेवाओं को बहाल करना शामिल है । 1 मई से 31 अगस्त , 2020 के बीच कुल 4,621 श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाई गईं , जिनमें 63.19 लाख विपरीत पलायन करने वाले प्रवासियों को ले जाया गया । इसके अलावा , उत्पादन और खपत केंद्रों को जोड़कर जल्दी खराब होने वाले फलों और सब्जियों के परिवहन के लिए कृषि रेल का विस्तार और किसानों को किसान रेल का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहन ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों और उत्पादकों को उनके उत्पादों का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है । किसान रेल को अक्टूबर , 2020 से अधिसूचित फलों और सब्जियों के परिवहन पर 50 प्रतिशत सब्सिडी सीधे दी जा रही है । ये महत्वपूर्ण पहलें हैं जिनका उद्देश्य निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करना और जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की बर्बादी को कम करना है । अंतर्देशीय जल परिवहन द्वारा माल ढुलाई लागत ( 1.06 रुपये / टन - किलोमीटर ) रेलवे ( 1.36 रुपये / टन - किलोमीटर ) और राजमार्ग ( 2.50 रुपये / टन - किलोमीटर ) की तुलना में सबसे कम है । इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों से विभिन्न घरेलू बाजारों में कृषि और गैर - कृषि उत्पादों के सुचारू , समय पर और किफायती ढुलाई के लिए अंतर्देशीय जलमार्ग एक सक्षम लॉजिस्टिक विकल्प तैयार कर सकता है । यह कम लागत वाले अंतर्देशीय जल परिवहन संचालन की शुरुआत कर सकता है । उदाहरण के लिए फरवरी , 2021 से अंतर्देशीय जलमार्गों के माध्यम से तरलीकृत प्राकृतिक गैस की ढुलाई की जा सकती है । अंतर्देशीय जलराशि पर पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश के साथ हस्ताक्षरित हालिया प्रोटोकॉल में नए मार्गों आदि

को शामिल करने का प्रस्ताव है जो भीतरी इलाकों को विकसित करने में मदद करेगा । विपणन को बढ़ावा और भंडारण सुरक्षा उपाय ग्रामीण बुनियादी ढांचे का एक बहुत ही महत्वपूर्ण लेकिन अक्सर उपेक्षित पहलू कृषि उपज का विपणन है । इस संदर्भ में राष्ट्रीय कृषि बाज़ार , जिसे ई - नाम भी कहा जाता है , ने एक आभासी ( वर्चुअल ) मंच ( प्लेटफॉर्म ) उपलब्ध कराया है जो पूरे देश में थोक मंडियों को एकीकृत करता है । इसका उद्देश्य कृषि और बागवानी वस्तुओं के ऑनलाइन व्यापार की सुविधा प्रदान करके किसानों के लिए लाभकारी कीमत सुनिश्चित करना है । इस प्लेटफॉर्म पर 1.69 करोड़ किसान और 1,820 किसान उत्पादक संगठन पंजीकृत हैं । यह मंच फसल का मूल्य पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित करने के साथ - साथ मंडियों में भीड़ - भाड़ से बचने और सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए , जो वर्तमान महामारी के समय में आवश्यक हैं , एक प्रभावकारी जरिया है । इससे पहले 2018-19 में 2,000 करोड़ रुपये के कार्पस फंड के साथ एक कृषि बाज़ार अवसंरचना कोष की घोषणा की गई थी । यह फंड कृषि विपणन के बुनियादी ढांचे के उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा । इसके अलावा , मनरेगा के माध्यम से पंचायतों के नियंत्रण में ग्रामीण हाटों के भौतिक बुनियादी ढांचे का विकास और उन्नयन ग्रामीण कृषि बाजारों के विकास को सुनिश्चित करता है । कृषि उत्पादों की भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में मालगोदामों और भंडारों का निर्माण या नवीनीकरण महत्वपूर्ण है । महामारी के प्रतिकूल प्रभाव के बावजूद कृषि विपणन अवसंरचना

( एएमआई ) के तहत कार्यान्वयन एजेंसियों को जारी की गई धनराशि और 2020-21 के दौरान एएमआई के तहत सहायता प्राप्त गोदामों / भंडारों की संख्या पिछले वर्षों की संख्या से तुलनीय है ( तालिका -2 ) । कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए बागवानी हेतु एकीकृत विकास मिशन और प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं । 

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जल आपूर्ति और बिजली सुनिश्चित करना 

एक संसाधन जिसके कई उपयोग हैं और जो लगभग हर प्रकार के उत्पादन और खपत के लिए आवश्यक है- वह है ' जल ' । निसंदेह जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे का एक महत्वपूर्ण अंग है । जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन के माध्यम से पेयजल सुनिश्चित करने में सक्षम बनाना है । 15 मार्च , 2021 तक 79 प्रतिशत ग्रामीण बस्तियों में 40 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन ( एलपीसीडी ) पेयजल था । घटते जल संसाधनों और कम होते जलस्तर को देखते हुए जल प्रबंधन का कौशल बहुत बड़ा हो जाता है जिसमें बुनियादी चुनौती शेष घरों को न्यूनतम सुविधाएं प्रदान करने की होती है अर्थात 18 प्रतिशत ग्रामीण बसावटें जिनमें 40 एलपीसीडी से कम पीने योग्य पानी है और 3 प्रतिशत ग्रामीण बसावटें जिनके पास दूषित जल संसाधन हैं ( तालिका -3 ) । अक्टूबर , 2017 में प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना “ सौभाग्य ' -गरीब घरों जिनमें ग्रामीण परिवार भी शामिल हैं , के विद्युतीकरण के लिए शुरू की गई थी । लगभग 281 करोड़ घरों का विद्युतीकरण किया गया है । अब चुनौती उन घरों में गुणवत्तापूर्ण और निर्वाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की है ।
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   सर्वव्यापी दूरसंचार

 सामाजिक दूरी के नियम बन जाने के साथ भौतिक दूरियों को पाटने में दूरसंचार की भूमिका और अधिक बढ़ गई है ( बॉक्स -1 ) । दुनिया में दूसरे सबसे बड़े दूरसंचार नेटवर्क के साथ जनवरी , 2021 में भारत का ग्रामीण टेली घनत्व 59.16 प्रतिशत था । ढाई लाख ग्राम पंचायतों को भारत नेट परियोजना के तहत ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की जा रही है । आसान और बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने की डिजिटल इंडिया पहल के तहत एक और कदम आगे बढ़ाते हुए अगस्त 2020 में यह घोषणा की गई कि आने वाले 1,000 दिनों में देश के सभी 6 लाख गांवों को ऑप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा जाएगा जिसमें लक्षद्वीप द्वीपसमूह भी शामिल है । ये पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर केबल से जुड़े होंगे । 8 मार्च , 2021 तक 1,03,400 ग्राम पंचायतों में वाई - फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके थे । इसके अलावा , सामरिक महत्व के स्थानों , दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में 354 अछूते गांवों को मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करने की पहल की गई है । अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए पहली लॉकडाउन अवधि के दौरान ' आरोग्य सेतु ' और ' किसान रथ ' सहित विभिन्न एप लांच किए गए थे । संचार बुनियादी ढांचे का एक अभिन्न अंग है । दूरदराज के क्षेत्रों मे

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भारत नेट परियोजना के तहत ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की जा रही है । आसान और बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने की डिजिटल इंडिया पहल के तहत एक और कदम आगे बढ़ाते हुए अगस्त 2020 में यह घोषणा की गई कि आने वाले 1,000 दिनों में देश के सभी 6 लाख गांवों को ऑप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा जाएगा जिसमें लक्षद्वीप द्वीपसमूह भी शामिल है । ये पनडुब्बी ऑप्टिकल फाइबर केबल से जुड़े होंगे । 8 मार्च , 2021 तक 1,03,400 ग्राम पंचायतों में वाई - फाई हॉटस्पॉट स्थापित किए जा चुके थे । आवश्यक आपूर्ति प्रदान करने में इसके विभिन्न साधनों की भूमिका तब और अधिक बढ़ गई जब भारतीय डाक द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की सहायता से देशभर की प्रयोगशालाओं को कोविड -19 परीक्षण किट की डिलीवरी और उनकी आपूर्ति की गई ।

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 निष्कर्ष

 संक्षेप में कहें तो सशक्त ग्रामीण बुनियादी ढांचे के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत के मिशन को पूरा किया जा सकता है । बेहतर ग्रामीण बुनियादी ढांचा , चाहे वह सड़क , वायु या जल परिवहन हो या फिर दूरसंचार , ग्रामीण विपणन , गोदामों का निर्माण या जल और बिजली आपूर्ति हो , ग्रामीण क्षेत्र में विकास के बेहतर अवसर प्रदान करने और किसानों , निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं को उत्पादन से संबद्ध गतिविधियों की उचित मूल्य अदायगी में सक्षम है । भौतिक दूरी के कारण वस्तुओं और सेवाओं तक पहुंच अक्सर बाधित होती है । नवाचार और प्रौद्योगिकी ने भौतिक दूरी को सफलतापूर्वक लांघ . लिया है जैसा कि अभी जारी महामारी की शुरुआत से ही स्पष्ट है । एक मजबूत ग्रामीण बुनियादी ढांचा अपने बहुआयामी प्रभाव से ग्रामीण परिवर्तन में योगदान देता है । इसलिए विपरीत पलायन करने वाले प्रवासियों सहित लाखों ग्रामीण निवासियों की आय और आजीविका सुनिश्चित करने के लिए ग्रामीण बुनियादी ढांचे के निर्माण और सुदृढीकरण को सुनिश्चित करने की सख्त आवश्यकता है । हालांकि मुख्य चुनौतियां निवेश को आकर्षित करने , गुणवत्ता बनाए रखने और भारत सरकार के कई संबंधित मंत्रालयों / विभागों के कार्यक्रमों और योजनाओं के अभिसरण को सुनिश्चित करने से जुड़ी हैं । बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत सरकार द्वारा कई उपाय किए गए हैं । इन उपायों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आवश्यक आपूर्ति समयबद्ध तरीके से अपने निर्धारित गंतव्यों तक पहुंचती रहे । महामारी से उत्पन्न कठिनाइयों को सफलतापूर्वक दूर करने में ऐसे उपायों की प्रभावशीलता देश के हितधारकों की दक्षताओं और अनुपालन के स्तर पर निर्भर करती है जिसमें राज्य और केंद्र सरकारें तथा समुदाय शामिल हैं ।

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